6 Dec 2016

#216 Kuchh likha hai maine aaj



कुछ लिखा है मैंने आज
बड़ी कोशिशों के बाद
जब मिले  प्रेरणा के स्रोत अनगिनत 
बन जाएँ जीवन के पल अनमोल
मुश्किलें भी लगे आसान
मन करे छूलूं आसमान
चुनिंदा शब्दों के साथ
कलम  को पकड़ी मैं एक रात
लिखूँ तो लिखूँ क्या अब
भावनाएं मेरे करें मुझे निशब्द
खोलूँ मैं शब्दों का पिटारा
दिखता जैसे झिलमिलाता तारा 
सजालूँ मैं उन्हें अब कागज़ पर 
जिनसे मेरी हटी न नज़र 
कुछ लिखा है मैंने आज 

कई सदियों के बाद 

- स्वाती सडंगी

4 comments: